ये तमन्ना है कि अब और तमन्ना न करें
शेर कहते रहें चुप चाप तक़ाज़ा न करें
सलमान अख़्तर
ज़िंदगी हम से तो इस दर्जा तग़ाफ़ुल न बरत
हम भी शामिल थे तिरे चाहने वालों में कभी
सलमान अख़्तर
ज़िंदगी इस क़दर कठिन क्यूँ है
आदमी की भला ख़ता क्या है
सलमान अख़्तर
कैसे कैसे रंग हैं तन्हाई की तस्वीर में
जब कभी फ़ुर्सत मिले तब आइने में देखना
सलमान सिद्दीक़ी
आब-ए-हैराँ पर किसी का अक्स जैसे जम गया
आँख में बस एक लम्हे के लिए ठहरा ख़याल
समीना राजा
क्या करें आँख अगर उस से सिवा चाहती है
ये जहान-ए-गुज़राँ आइना-ख़ाना ही सही
समीना राजा
सफ़र की शाम सितारा नसीब का जागा
फिर आसमान-ए-मोहब्बत पे इक हिलाल खिला
समीना राजा

