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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

साँस लेने से भी भरता नहीं सीने का ख़ला
जाने क्या शय है जो बे-दख़्ल हुई है मुझ में

सलीम कौसर




'सलीम' अब तक किसी को बद-दुआ दी तो नहीं लेकिन
हमेशा ख़ुश रहे जिस ने हमारा दिल दुखाया है

सलीम कौसर




तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था

सलीम कौसर




तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था

सलीम कौसर




तुम ने सच बोलने की जुरअत की
ये भी तौहीन है अदालत की

सलीम कौसर




तुम ने सच बोलने की जुरअत की
ये भी तौहीन है अदालत की

सलीम कौसर




तुम तो कहते थे कि सब क़ैदी रिहाई पा गए
फिर पस-ए-दीवार-ए-ज़िंदाँ रात-भर रोता है कौन

सलीम कौसर