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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

वो आशिक़ हैं कि मरने पर हमारे
करेंगे याद हम को उम्र भर आप

सख़ी लख़नवी




वो आशिक़ हैं कि मरने पर हमारे
करेंगे याद हम को उम्र भर आप

सख़ी लख़नवी




यूँही वादा करो यक़ीं हो जाए
क्यूँ क़सम लूँ क़सम के क्या मअनी

सख़ी लख़नवी




ज़िंदगी तक मिरी हँस लीजिए आप
फिर मुझे रोइएगा मेरे ब'अद

सख़ी लख़नवी




ज़िंदगी तक मिरी हँस लीजिए आप
फिर मुझे रोइएगा मेरे ब'अद

सख़ी लख़नवी




आवाज़ों से जिस्म हुआ नम
जैसे इक ना-बीना सा ग़म

सलाहुद्दीन महमूद




आँसू हूँ हँस रहा हूँ शगूफ़ों के दरमियाँ
शबनम हूँ जल रहा हूँ शरारों के शहर में

सलाम मछली शहरी