ये ज़ुल्फ़-ए-यार भी क्या बिजलियों का झुरमुट है
ख़ुदाया ख़ैर हो अब मेरे आशियाने की
रज़ी रज़ीउद्दीन
ये ज़ुल्फ़-ए-यार भी क्या बिजलियों का झुरमुट है
ख़ुदाया ख़ैर हो अब मेरे आशियाने की
रज़ी रज़ीउद्दीन
इक सहीफ़ा नया उतरा है सुना है लोगो
मारना दोस्त का भी जिस में रवा है लोगो
रज़िया फ़सीह अहमद
इक सहीफ़ा नया उतरा है सुना है लोगो
मारना दोस्त का भी जिस में रवा है लोगो
रज़िया फ़सीह अहमद
इक सहीफ़ा नया उतरा है सुना है लोगो
मारना दोस्त का भी जिस में रवा है लोगो
रज़िया फ़सीह अहमद
जिस को तुम कहते हो ख़ुश-बख़्त सदा है मज़लूम
जीना हर दौर में औरत का ख़ता है लोगो
रज़िया फ़सीह अहमद
हुए ख़त्म सिगरेट अब क्या करें हम
है पिछ्ला पहर रात के दो बजे हैं
रज़्ज़ाक़ अरशद

