दिल इक ऐसा कासा है जिस की गहराई मत पूछो
जितने सिक्के डालोगे उतना ख़ाली रह जाएगा
राना आमिर लियाक़त
दिल क़नाअत ज़रा सी करता तो
हर मोहब्बत थी आख़िरी मेरी
राना आमिर लियाक़त
गले लगा के मुझे पूछ मसअला क्या है
मैं डर रहा हूँ तुझे हाल-ए-दिल सुनाने से
राना आमिर लियाक़त
हर साँस नई साँस है हर दिन है मिरा दिन
तक़दीर लिए आती है हर रोज़ नया दिन
राना आमिर लियाक़त
हज़ार रस्ते तिरे हिज्र के इलाज के हैं
हम अहल-ए-इश्क़ ज़रा मुख़्तलिफ़ मिज़ाज के हैं
राना आमिर लियाक़त
ईंट से ईंट जोड़ कर, ख़्वाब बना रहा हूँ मैं
रख़्ने न डाल मेरे यार' ख़्वाब की देख-भाल में
राना आमिर लियाक़त
इस दौर-ए-ना-मुराद से ये तजरबा हुआ
दीवार गुफ़्तुगू के लिए बेहतरीन है
राना आमिर लियाक़त

