यानी कोई कमी नहीं मुझ में
यानी मुझ में कमी उसी की है
रम्ज़ी असीम
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आओ आँखें मिला के देखते हैं
कौन कितना उदास रहता है
राना आमिर लियाक़त
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आओ आँखें मिला के देखते हैं
कौन कितना उदास रहता है
राना आमिर लियाक़त
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आधे घर में मैं होता हूँ आधे घर में तन्हाई
कौन सी चीज़ कहाँ रख दी है कौन मुझे बतलाएगा
राना आमिर लियाक़त
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अगरचे रोज़ मिरा सब्र आज़माता है
मगर ये दरिया मुझे तैरना सिखाता है
राना आमिर लियाक़त
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ऐसी प्यारी शाम में जी बहलाने को
पाँव निकाले जा सकते हैं चादर से
राना आमिर लियाक़त
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अपना आप पड़ा रह जाता है बस इक अंदाज़े पर
आधे हम इस धरती पर हैं आधे उस सय्यारे पर
राना आमिर लियाक़त
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