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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

यानी कोई कमी नहीं मुझ में
यानी मुझ में कमी उसी की है

रम्ज़ी असीम




आओ आँखें मिला के देखते हैं
कौन कितना उदास रहता है

राना आमिर लियाक़त




आओ आँखें मिला के देखते हैं
कौन कितना उदास रहता है

राना आमिर लियाक़त




आधे घर में मैं होता हूँ आधे घर में तन्हाई
कौन सी चीज़ कहाँ रख दी है कौन मुझे बतलाएगा

राना आमिर लियाक़त




अगरचे रोज़ मिरा सब्र आज़माता है
मगर ये दरिया मुझे तैरना सिखाता है

राना आमिर लियाक़त




ऐसी प्यारी शाम में जी बहलाने को
पाँव निकाले जा सकते हैं चादर से

राना आमिर लियाक़त




अपना आप पड़ा रह जाता है बस इक अंदाज़े पर
आधे हम इस धरती पर हैं आधे उस सय्यारे पर

राना आमिर लियाक़त