खींच लाई है तिरे दश्त की वहशत वर्ना
कितने दरिया ही मिरी प्यास बुझाने आते
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
खींच लाई है तिरे दश्त की वहशत वर्ना
कितने दरिया ही मिरी प्यास बुझाने आते
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
मिरी जगह पे कोई और हो तो चीख़ उट्ठे
मैं अपने आप से इतने सवाल करता हूँ
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तमाम शहर गिरफ़्तार है अज़िय्यत में
किसे कहूँ मिरे अहबाब की ख़बर रक्खे
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तुम्हारे साथ कई रंज बाँटने हैं हमें
सो एक दिन के लिए ज़िंदगी से फ़ुर्सत लो
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
तुम्हारे साथ कई रंज बाँटने हैं हमें
सो एक दिन के लिए ज़िंदगी से फ़ुर्सत लो
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
या उन्हें आती नहीं बज़्म-ए-सुख़न-आराई
या हमें बज़्म के आदाब नहीं आते हैं
रम्ज़ी असीम
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

