EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

आज बार-ए-गोश है मेरी सदा उस को मगर
मेरे शेरों को ज़माना देर तक दोहराएगा

राणा गन्नौरी




अब मुझे थोड़ी सी ग़फ़लत से भी डर लगता है
आँख लगती है कि दीवार से सर लगता है

राणा गन्नौरी




ऐ ख़ुदा मैं सुन रहा हूँ आहटें उस वक़्त की
जब तिरी दुनिया का हर बंदा ख़ुदा हो जाएगा

राणा गन्नौरी




ऐ ख़ुदा मैं सुन रहा हूँ आहटें उस वक़्त की
जब तिरी दुनिया का हर बंदा ख़ुदा हो जाएगा

राणा गन्नौरी




हम ने दुनिया से सुलूक ऐसा किया है 'राना'
हम न होंगे तो बहुत याद करेगी दुनिया

राणा गन्नौरी




हमारा दिल तो ग़म में भी ख़ुशी महसूस करता है
वही मुश्किल में रहते हैं जो ग़म को ग़म समझते हैं

राणा गन्नौरी




हमारा दिल तो ग़म में भी ख़ुशी महसूस करता है
वही मुश्किल में रहते हैं जो ग़म को ग़म समझते हैं

राणा गन्नौरी