मिरे बनाए हुए बुत में रूह फूँक दे अब
न एक उम्र की मेहनत मिरी अकारत कर
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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मिरे वास्ते जाने क्या लाएगी
गई है हवा इक खंडर की तरफ़
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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मोहब्बतें न रहीं उस के दिल में मेरे लिए
मगर वो मिलता था हँस कर कि वज़्अ-दार जो था
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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मोहब्बतें न रहीं उस के दिल में मेरे लिए
मगर वो मिलता था हँस कर कि वज़्अ-दार जो था
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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ओस से प्यास कहाँ बुझती है
मूसला-धार बरस मेरी जान
राजेन्द्र मनचंदा बानी
पैहम मौज-ए-इमकानी में
अगला पाँव नए पानी में
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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पैहम मौज-ए-इमकानी में
अगला पाँव नए पानी में
राजेन्द्र मनचंदा बानी
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