अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है
परवीन शाकिर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अजब नहीं है कि दिल पर जमी मिली काई
बहुत दिनों से तो ये हौज़ साफ़ भी न हुआ
परवीन शाकिर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अक्स-ए-ख़ुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊँ तो मुझ को न समेटे कोई
परवीन शाकिर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे
परवीन शाकिर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
इक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ
परवीन शाकिर
बारहा तेरा इंतिज़ार किया
अपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह
परवीन शाकिर
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
परवीन शाकिर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

