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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

आँख से ओझल हो और टूटे पर्बत जैसी प्रीत
मुँह देखे की यारी 'परतव' शीशे की सी प्रीत

परतव रोहिला




साजन तुम तो आप ही भूले अपने प्रीत के बोल
अब मैं किस के द्वारे जाऊँ ले चाहत कश्कोल

परतव रोहिला




तेरे मिलन का सुख न पाया पीत हुई जंजाल
साजन मेरे मन में धड़के बिर्हा का घड़ियाल

परतव रोहिला




वक़्त ने सब भुला दिया 'परतव'
इश्क़ क्या शय है आशिक़ी क्या है

परतव रोहिला




खुल के रो लूँ तो ज़रा जी सँभले
मुस्कुराना ही मसर्रत तो नहीं

परवीन फ़ना सय्यद




मेरी आँखों में उतरने वाले
डूब जाना तिरी आदत तो नहीं

परवीन फ़ना सय्यद




तेरी पहचान के लाखों अंदाज़
सर झुकाना ही इबादत तो नहीं

परवीन फ़ना सय्यद