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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मेरी आँखों में हैं आँसू तेरे दामन में बहार
गुल बना सकता है तू शबनम बना सकता हूँ मैं

नुशूर वाहिदी




'नुशूर' आलूदा-ए-इस्याँ सही पर कौन बाक़ी है
ये बातें राज़ की हैं क़िब्ला-ए-आलम भी पीते हैं

नुशूर वाहिदी




क़दम मय-ख़ाना में रखना भी कार-ए-पुख़्ता-काराँ है
जो पैमाना उठाते हैं वो थर्राया नहीं करते

नुशूर वाहिदी




सलीक़ा जिन को होता है ग़म-ए-दौराँ में जीने का
वो यूँ शीशे को हर पत्थर से टकराया नहीं करते

नुशूर वाहिदी




सरक कर आ गईं ज़ुल्फ़ें जो इन मख़मूर आँखों तक
मैं ये समझा कि मय-ख़ाने पे बदली छाई जाती है

नुशूर वाहिदी




तारीख़-ए-जुनूँ ये है कि हर दौर-ए-ख़िरद में
इक सिलसिला-ए-दार-ओ-रसन हम ने बनाया

नुशूर वाहिदी




उसी को ज़िंदगी का साज़ दे के मुतमइन हूँ मैं
वो हुस्न जिस को हुस्न-ए-बे-सबात कहते आए हैं

नुशूर वाहिदी