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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

तू अगर अब्र है मैं अब्र में पानी की तरह
मैं तिरे साथ हूँ लफ़्ज़ों में मआनी की तरह

नोमान इमाम




आज आएँगे कल आएँगे कल आएँगे आज आएँगे
मुद्दत से यही वो कहते हैं मुद्दत से यही हम सुनते हैं

नूह नारवी




आप आए बन पड़ी मेरे दिल-ए-नाशाद की
आप बिगड़े बन गई मेरे दिल-ए-नाशाद पर

नूह नारवी




आप जो कहते हैं सब हज़रत-ए-नासेह है बजा
क्या करूँ ज़ेहन से ये लफ़्ज़ उतर जाते हैं

नूह नारवी




आते आते राह पर वो आएँगे
जाते जाते बद-गुमानी जाएगी

नूह नारवी




अभी उस क़यामत को मैं क्या कहूँ
जो गुज़रेगी जी से गुज़रने के बा'द

नूह नारवी




अच्छे बुरे को वो अभी पहचानते नहीं
कमसिन हैं भोले-भाले हैं कुछ जानते नहीं

नूह नारवी