रोक दो ये रौशनी की तेज़ धार
मेरी मिट्टी में गुँधी है रात भी
नोमान शौक़
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रूह की थाप न रोको कि क़यामत होगी
तुम को मालूम नहीं कौन कहाँ रक़्स में है
नोमान शौक़
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सारे चक़माक़-बदन आए थे तय्यारी से
रौशनी ख़ूब हुई रात की चिंगारी से
नोमान शौक़
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सब जहाँगीर नियामों से निकल आएँगे
अब तो ज़ंजीर हिलाते हुए डरता हूँ मैं
नोमान शौक़
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सैर-ए-दुनिया को जाते हो जाओ
है कोई शहर मेरे दिल जैसा
नोमान शौक़
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सुना है शोर से हल होंगे सारे मसअले इक दिन
सो हम आवाज़ को आवाज़ से टकराते रहते हैं
नोमान शौक़
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सुनाई देती है सात आसमाँ में गूँज अपनी
तुझे पुकार के हैरान उड़ते फिरते हैं
नोमान शौक़
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