औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है
औरत अपना आप गँवाए तब भी मुजरिम होती है
नीलमा सरवर
टैग:
| औरत |
| 2 लाइन शायरी |
कोई तो आए ख़िज़ाँ में पत्ते उगाने वाला
गुलों की ख़ुशबू को क़ैद करना कोई तो सीखे
नीलमा सरवर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हसरत-ए-मौसम-ए-गुलाब हूँ मैं
सच न हो पाएगा वो ख़्वाब हूँ मैं
नीना सहर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कैसे होती है शब की सहर देखते
काश हम भी कभी जाग कर देखते
नीना सहर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कल तिरे एहसास की बारिश तले
मेरा सूना-पन नहाया देर तक
नीना सहर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
मारो पत्थर भी तो नहीं हिलता
जम चुका है अब इस क़दर पानी
नीना सहर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
मिरी प्यास का तराना यूँ समझ न आ सकेगा
मुझे आज सुन के देखो मिरी ख़ामोशी से आगे
नीना सहर
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

