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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

निदा फ़ाज़ली




बड़े बड़े ग़म खड़े हुए थे रस्ता रोके राहों में
छोटी छोटी ख़ुशियों से ही हम ने दिल को शाद किया

निदा फ़ाज़ली




बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए

निदा फ़ाज़ली




बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान
अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान

निदा फ़ाज़ली




बदला न अपने-आप को जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे

निदा फ़ाज़ली




बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी
सलीक़ा चाहिए आवारगी में

निदा फ़ाज़ली




बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

निदा फ़ाज़ली