सब्र की रिश्वत माँग रही हैं
साजन की पटवारी आँखें
नज़ीर जालंधरी
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अब के बार मैं तुझ से मिलने नहीं आया
तुझ को अपने साथ ले जाने आया हूँ
नज़ीर क़ैसर
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बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
नज़ीर क़ैसर
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बरस रही थी बारिश बाहर
और वो भीग रहा था मुझ में
नज़ीर क़ैसर
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बस हम दोनों ज़िंदा हैं
बाक़ी दुनिया फ़ानी है
नज़ीर क़ैसर
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बिखर के जाता कहाँ तक कि मैं तो ख़ुशबू था
हवा चली थी मुझे अपने हम-रिकाब लिए
नज़ीर क़ैसर
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चलते चलते मैं उस को घर ले आया
वो भी अपना हाथ छुड़ाना भूल गया
नज़ीर क़ैसर
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