शाह-बलूत के ऊपर देख
चाँद धरा है थाली पर
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तुझ से बिछड़े गाँव छूटा शहर में आ कर बसे
तज दिए सब संगी साथी त्याग डाला देस भी
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तुझ से मिली निगाह तो देखा कि दरमियाँ
चाँदी के आबशार थे सोने की राह थी
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तुझे पछाड़ न दें रौशनी में तेरे रफ़ीक़
दया बुझे न बुझे तो भी फूँक मार तो ले
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उम्रों के बुझते मामूरे में
मैं ने हर लम्हा तुझ को सोचा
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
याद आए तू मुझ को बहुत जब शब कटे जब पौ फटे
जब वादियों में दूर तक कोहरा दिखे बे-अंत सा
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
देखा उसे तो आँख से आँसू निकल पड़े
दरिया अगरचे ख़ुश्क था पानी तहों में था
नासिर ज़ैदी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

