इक ख़ित्ता-ए-ख़ूँ में कहीं दरिया के किनारे
दीवार-ए-ज़माना से गिरा ध्यान फिसल कर
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
जब कि तुझ बिन नहीं मौजूद कोई
अपने होने का यक़ीं कैसे करूँ
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
खिले धान खिलखिला कर पड़े नद्दियों में नाके
घनी ख़ुशबुओं से महके मिरे देस के इलाक़े
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कुछ गुरेज़ाँ भी रहे हम ख़ुद से
कुछ कहानी भी अलमनाक हुई
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
मजमा' नहीं मुजल्ला है अशआ'र की जगह
भर और कोई स्वाँग जो होना ही हूट है
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
नैन नचंत हैं देख के तुझ को
दिल है अज़ल से हक्का-बक्का
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
पाँव के नीचे सरकती हुई रीत
सर में मसनद की हवा बाक़ी है
नासिर शहज़ाद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

