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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

पर तोल के बैठी है मगर उड़ती नहीं है
तस्वीर से चिड़िया को उड़ा देना चाहिए

मोहम्मद अल्वी




परिंदे दूर फ़ज़ाओं में खो गए 'अल्वी'
उजाड़ उजाड़ दरख़्तों पे आशियाने थे

मोहम्मद अल्वी




रात कौन आया था
कर गया सहर रौशन

मोहम्मद अल्वी




रात मिली तन्हाई मिली और जाम मिला
घर से निकले तो क्या क्या आराम मिला

मोहम्मद अल्वी




रात पड़े घर जाना है
सुब्ह तलक मर जाना है

मोहम्मद अल्वी




रखते हो अगर आँख तो बाहर से न देखो
देखो मुझे अंदर से बहुत टूट चुका हूँ

मोहम्मद अल्वी




रोज़ अच्छे नहीं लगते आँसू
ख़ास मौक़ों पे मज़ा देते हैं

मोहम्मद अल्वी