रात उस बज़्म में तस्वीर के मानिंद थे हम
हम से पूछे तो कोई शम्अ का जलना क्या था
मीर अहमद नवेद
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ज़ख़्म-ए-तलाश में है निहाँ मरहम-ए-दलील
तू अपना दिल न हार मोहब्बत बहाल रख
मीर अहमद नवेद
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अब तो बातें भी हो गईं मौक़ूफ़
अरिनी है न लन-तरानी है
मीर अली औसत रशक
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हद से गुज़रा जब इंतिज़ार तिरा
मौत का हम ने इंतिज़ार किया
मीर अली औसत रशक
सुना रहा हूँ नकीरैन को फ़साना-ए-हिज्र
सवाल उन के जुदा हैं मिरे जवाब जुदा
मीर अली औसत रशक
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आशिक़ को देखते हैं दुपट्टे को तान कर
देते हैं हम को शर्बत-ए-दीदार छान कर
मीर अनीस
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'अनीस' आसाँ नहीं आबाद करना घर मोहब्बत का
ये उन का काम है जो ज़िंदगी बर्बाद करते हैं
मीर अनीस
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