वहशत वहशत तिरी तफ़रीह का सामाँ है अभी
कि गरेबाँ का मिरे नाम गरेबाँ है अभी
मंज़र लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
वो तो कहिए आप की उल्फ़त में दिल बहला रहा
वर्ना दुनिया चार दिन भी रहने के क़ाबिल न थी
मंज़र लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ये इंसान नादीदा उल्फ़त का मारा
ख़ुदा जाने किस किस को सज्दा करेगा
मंज़र लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ज़ुल्म पर ज़ुल्म आ गए ग़ालिब
आबले आबलों को छोड़ गए
मंज़र लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
आश्नाई रही न रुस्वाई
ख़ूँ-चकाँ गुफ़्तुगू करें कैसे
मंज़र मुफ़्ती
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अच्छी क़िस्मत अच्छा मौसम अच्छे लोग
फिर भी दिल घबरा जाता है बाज़ औक़ात
मंज़र नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उस के अस्बाब से निकला है परेशाँ काग़ज़
बात इतनी थी मगर ख़ूब उछाली हम ने
मंज़र नक़वी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

