फिरते हैं कई क़ैस से हैरान ओ परेशान
इस इश्क़ की सरकार में बहबूद नहीं है
जोशिश अज़ीमाबादी
रखते हैं दहानों पे सदा मोहर-ए-ख़मोशी
वे लोग जिन्हें आती है गुफ़्तार-ए-मोहब्बत
जोशिश अज़ीमाबादी
सबा भी दूर खड़ी अपने हाथ मलती है
तिरी गली में किसी का गुज़र नहीं हरगिज़
जोशिश अज़ीमाबादी
सज्दा जिसे करें हैं वो हर-सू है जल्वा-गर
जीधर तिरा मिज़ाज हो ऊधर नमाज़ कर
जोशिश अज़ीमाबादी
शर्त अंदाज़ है अगर आए
बात छोटी हो या बड़ी मुँह पर
जोशिश अज़ीमाबादी
त'अना-ज़न कुफ़्र पे होता है अबस ऐ ज़ाहिद
बुत-परस्ती है तिरे ज़ोहद-ए-रिया से बेहतर
जोशिश अज़ीमाबादी
तनिक ऊधर ही रह ऐ हिर्स-ए-दुनिया
न दे तकलीफ़ इस गोशा-नशीं को
जोशिश अज़ीमाबादी

