बस कर ये ख़याल-आफ़रीनी
उस के ही ख़याल में रहा कर
जोशिश अज़ीमाबादी
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बे-गुनह कहता फिरे है आप को
शैख़ नस्ल-ए-हज़रत-ए-आदम नहीं
जोशिश अज़ीमाबादी
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भूल जाता हूँ मैं ख़ुदाई को
उस से जब राम राम होती है
जोशिश अज़ीमाबादी
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चश्म-ए-वहदत से गर कोई देखे
बुत-परस्ती भी हक़-परस्ती है
जोशिश अज़ीमाबादी
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छुप-छुप के देखते हो बहुत उस को हर कहीं
होगा ग़ज़ब जो पड़ गई उस की नज़र कहीं
जोशिश अज़ीमाबादी
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दाग़-ए-जिगर का अपने अहवाल क्या सुनाऊँ
भरते हैं उस के आगे शम्-ओ-चराग़ पानी
जोशिश अज़ीमाबादी
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ध्यान में उस के फ़ना हो कर कोई मुँह देख ले
दिल वो आईना नहीं जो हर कोई मुँह देख ले
जोशिश अज़ीमाबादी
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