सदा न उजला दिन ही रहे और सदा न काली रेन
रंग बदलता जाए समय और टुक-टुक देखें नैन
जमाल पानीपती
समय के सारे खेल हैं प्यारे कह गए जगत 'कबीर'
आप हँसाए आप रुलाये आप बँधाए धीर
जमाल पानीपती
समय की रचना समय का फेर और समय के सब बहरूप
क्या अँधियारे क्या उजियाले क्या छाँव क्या धूप
जमाल पानीपती
कुंज-ए-क़फ़स ही जिस का मुक़द्दर हुआ 'जमील'
उस की नज़र में दौर-ए-ख़िज़ाँ क्या बहार क्या
जमील अज़ीमाबादी
बाग़ में जा कर देख लिया
कोई नहीं था तुझ सा फूल
जमील मलिक
दिल की क़ीमत तो मोहब्बत के सिवा कुछ भी न थी
जो मिले सूरत-ए-ज़ेबा के ख़रीदार मिले
जमील मलिक
एक ज़रा सी भूल पे हम को इतना तू बदनाम न कर
हम ने अपने घाव छुपा कर तेरे काज सँवारे हैं
जमील मलिक

