क्या क्या दिलों का ख़ौफ़ छुपाना पड़ा हमें
ख़ुद डर गए तो सब को डराना पड़ा हमें
जलील ’आली’
प्यार वो पेड़ है सौ बार उखाड़ो दिल से
फिर भी सीने में कोई दाब सलामत रह जाए
जलील ’आली’
रास्ता आगे भी ले जाता नहीं
लौट कर जाना भी मुश्किल हो गया
जलील ’आली’
रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है
सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है
जलील ’आली’
तो ज़िंदगी को जिएँ क्यूँ न ज़िंदगी की तरह
कहीं पे फूल कहीं पर शरर बनाते हुए
जलील ’आली’
तुम्हारा क्या तुम्हें आसाँ बहुत रस्ते बदलना है
हमें हर एक मौसम क़ाफ़िले के साथ चलना है
जलील ’आली’
उसे दिल से भुला देना ज़रूरी हो गया है
ये झगड़ा ही मिटा देना ज़रूरी हो गया है
जलील ’आली’

