गई थी कह के मैं लाती हूँ ज़ुल्फ़-ए-यार की बू
फिरी तो बाद-ए-सबा का दिमाग़ भी न मिला
जलाल लखनवी
टैग:
| Zulf |
| 2 लाइन शायरी |
इश्क़ की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही
दर्द कम हो या ज़ियादा हो मगर हो तो सही
जलाल लखनवी
'जलाल' अहद-ए-जवानी है दोगे दिल सौ बार
अभी की तौबा नहीं ए'तिबार के क़ाबिल
जलाल लखनवी
न हो बरहम जो बोसा बे-इजाज़त ले लिया मैं ने
चलो जाने दो बेताबी में ऐसा हो ही जाता है
जलाल लखनवी
टैग:
| बोसा |
| 2 लाइन शायरी |
पहुँचे न वहाँ तक ये दुआ माँग रहा हूँ
क़ासिद को उधर भेज के ध्यान आए है क्या क्या
जलाल लखनवी
टैग:
| Qasid |
| 2 लाइन शायरी |
वा'दा क्यूँ बार बार करते हो
ख़ुद को बे-ए'तिबार करते हो
जलाल लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
दिल को इस तरह देखने वाले
दिल अगर बे-क़रार हो जाए
जलालुद्दीन अकबर

