सब को निशाना करते करते
ख़ुद को मार गिराया हम ने
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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समुंदर अदा-फ़हम था रुक गया
कि हम पाँव पानी पे धरने को थे
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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सर अगर सर है तो नेज़ों से शिकायत कैसी
दिल अगर दिल है तो दरिया से बड़ा होना है
इरफ़ान सिद्दीक़ी
सरहदें अच्छी कि सरहद पे न रुकना अच्छा
सोचिए आदमी अच्छा कि परिंदा अच्छा
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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शम्-ए-ख़ेमा कोई ज़ंजीर नहीं हम-सफ़राँ
जिस को जाना है चला जाए इजाज़त कैसी
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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शोला-ए-इश्क़ बुझाना भी नहीं चाहता है
वो मगर ख़ुद को जलाना भी नहीं चाहता है
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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सुना था मैं ने कि फ़ितरत ख़ला की दुश्मन है
सो वो बदन मिरी तन्हाइयों को पाट गया
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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