EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

उदास ख़ुश्क लबों पर लरज़ रहा होगा
वो एक बोसा जो अब तक मिरी जबीं पे नहीं

इरफ़ान सिद्दीक़ी




उस की आँखें हैं कि इक डूबने वाला इंसाँ
दूसरे डूबने वाले को पुकारे जैसे

इरफ़ान सिद्दीक़ी




उस को मंज़ूर नहीं है मिरी गुमराही भी
और मुझे राह पे लाना भी नहीं चाहता है

इरफ़ान सिद्दीक़ी




उस को रहता है हमेशा मरी वहशत का ख़याल
मेरे गुम-गश्ता ग़ज़ालों का पता चाहती है

इरफ़ान सिद्दीक़ी




उस से बिछड़े तो तुम्हें कोई न पहचानेगा
तुम तो परछाईं हो पैकर की तरफ़ लौट चलो

इरफ़ान सिद्दीक़ी




उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए

इरफ़ान सिद्दीक़ी




वगर्ना तंग न थी इश्क़ पर ख़ुदा की ज़मीं
कहा था उस ने तो मैं अपने घर चला भी गया

इरफ़ान सिद्दीक़ी