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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मुझ से जल्दी हार कर मेरा हरीफ़
जीतने का लुत्फ़ सारा ले गया

हस्तीमल हस्ती




प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है

हस्तीमल हस्ती




राहत रोटी आसरा नींदें दवा क़मीज़
आज मोहब्बत भी हुई सपनों वाली चीज़

हस्तीमल हस्ती




तेरी बीनाई किसी दिन छीन लेगा देखना
देर तक रहना तिरा ये आइनों के दरमियाँ

हस्तीमल हस्ती




वो जो क़िस्से में था शामिल वही कहता है मुझे
मुझ को मालूम नहीं यार ये क़िस्सा क्या है

हस्तीमल हस्ती




ये तजरबा हुआ है मोहब्बत की राह में
खो कर मिला जो हम को वो पा कर नहीं मिला

हस्तीमल हस्ती




ऐन-ए-का'बा में है मस्तों की जगह
कह रही हैं तह-ए-अबरू आँखें

हातिम अली मेहर