जो देखते तिरी ज़ंजीर-ए-ज़ुल्फ़ का आलम
असीर होने की आज़ाद आरज़ू करते
हैदर अली आतिश
काबा ओ दैर में है किस के लिए दिल जाता
यार मिलता है तो पहलू ही में है मिल जाता
हैदर अली आतिश
करता है क्या ये मोहतसिब-ए-संग-दिल ग़ज़ब
शीशों के साथ दिल न कहीं चूर चूर हों
हैदर अली आतिश
कौन से दिन हाथ में आया मिरे दामान-ए-यार
कब ज़मीन-ओ-आसमाँ का फ़ासला जाता रहा
हैदर अली आतिश
ख़ुदा दराज़ करे उम्र चर्ख़-ए-नीली की
ये बेकसों के मज़ारों का शामियाना है
हैदर अली आतिश
किसी की महरम-ए-आब-ए-रवाँ की याद आई
हबाब के जो बराबर कभी हबाब आया
हैदर अली आतिश
किसी ने मोल न पूछा दिल-ए-शिकस्ता का
कोई ख़रीद के टूटा पियाला क्या करता
हैदर अली आतिश

