तुम कभी एक नज़र मेरी तरफ़ भी देखो
इक तवक़्क़ो ही तो है कोई गुज़ारिश तो नहीं
फ़ाज़िल जमीली
ज़िंदगी हो तो कई काम निकल आते हैं
याद आऊँगा कभी मैं भी ज़रूरत में उसे
फ़ाज़िल जमीली
ज़ियादा देर उसे देखना भी है 'फ़ाज़िल'
और अपने आप को थोड़ा सा कम भी रखना है
फ़ाज़िल जमीली
आँखों का तो काम ही है रोना
ये गिर्या-ए-बे-सबब है प्यारे
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
अहल-ए-हुनर के दिल में धड़कते हैं सब के दिल
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
फ़रेब-ए-करम इक तो उन का है इस पर
सितम मेरी ख़ुश-फ़हमियाँ और भी हैं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
ग़म-ए-दौराँ में कहाँ बात ग़म-ए-जानाँ की
नज़्म है अपनी जगह ख़ूब मगर हाए ग़ज़ल
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली

