मैं जुर्म का ए'तिराफ़ कर के
कुछ और है जो छुपा गया हूँ
जौन एलिया
मैं जो हूँ 'जौन-एलिया' हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
जौन एलिया
मैं इस दीवार पर चढ़ तो गया था
उतारे कौन अब दीवार पर से
जौन एलिया
मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
जौन एलिया
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
जौन एलिया
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
जौन एलिया
कल का दिन हाए कल का दिन ऐ 'जौन'
काश इस रात हम भी मर जाएँ
जौन एलिया
कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है
जौन एलिया
कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मिरी जान तेरे बस का नहीं
जौन एलिया

