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जौन एलिया शायरी | शाही शायरी

जौन एलिया शेर

159 शेर

'जौन' दुनिया की चाकरी कर के
तू ने दिल की वो नौकरी क्या की

जौन एलिया




जिस्म में आग लगा दूँ उस के
और फिर ख़ुद ही बुझा दूँ उस को

जौन एलिया




जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है

जौन एलिया




जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँ
तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते

जौन एलिया




काम की बात मैं ने की ही नहीं
ये मिरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

जौन एलिया




कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया

जौन एलिया




कल का दिन हाए कल का दिन ऐ 'जौन'
काश इस रात हम भी मर जाएँ

जौन एलिया




कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है

जौन एलिया




कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मिरी जान तेरे बस का नहीं

जौन एलिया