यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
जौन एलिया
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
जौन एलिया
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
जौन एलिया
ज़िंदगी क्या है इक कहानी है
ये कहानी नहीं सुनानी है
जौन एलिया
मरहम-ए-हिज्र था अजब इक्सीर
अब तो हर ज़ख़्म भर गया होगा
जौन एलिया
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
जौन एलिया
मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
जौन एलिया
मैं इस दीवार पर चढ़ तो गया था
उतारे कौन अब दीवार पर से
जौन एलिया
मैं जो हूँ 'जौन-एलिया' हूँ जनाब
इस का बेहद लिहाज़ कीजिएगा
जौन एलिया

