मिरे घर में तो कोई भी नहीं है
ख़ुदा जाने मैं किस से डर रहा हूँ
अमीर क़ज़लबाश
उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी
ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी
अमीर क़ज़लबाश
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़
हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा
अमीर क़ज़लबाश
वक़्त के साथ बदलना तो बहुत आसाँ था
मुझ से हर वक़्त मुख़ातिब रही ग़ैरत मेरी
अमीर क़ज़लबाश
यार क्या ज़िंदगी है सूरज की
सुब्ह से शाम तक जला करना
अमीर क़ज़लबाश
यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
अमीर क़ज़लबाश
ज़िंदगी और हैं कितने तिरे चेहरे ये बता
तुझ से इक उम्र की हालाँकि शनासाई है
अमीर क़ज़लबाश
ज़िंदगी की दौड़ में पीछे न था
रह गया वो सिर्फ़ दो इक गाम से
अमीर क़ज़लबाश
आइने से नज़र चुराते हैं
जब से अपना जवाब देखा है
अमीर क़ज़लबाश

