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जिंदगी शायरी | शाही शायरी

जिंदगी

163 शेर

ज़िंदगी जब अज़ाब होती है
आशिक़ी कामयाब होती है

दुष्यंत कुमार




ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़




ज़िंदगी नाम है इक जोहद-ए-मुसलसल का 'फ़ना'
राह-रौ और भी थक जाता है आराम के बा'द

फ़ना निज़ामी कानपुरी




हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी'
ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का

फ़ानी बदायुनी




इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का

फ़ानी बदायुनी




किस ख़राबी से ज़िंदगी 'फ़ानी'
इस जहान-ए-ख़राब में गुज़री

फ़ानी बदायुनी




मौत आने तक न आए अब जो आए हो तो हाए
ज़िंदगी मुश्किल ही थी मरना भी मुश्किल हो गया

फ़ानी बदायुनी