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प्रेरक शायरी | शाही शायरी

प्रेरक

112 शेर

'शुऊर' सिर्फ़ इरादे से कुछ नहीं होता
अमल है शर्त इरादे सभी के होते हैं

अनवर शऊर




हाँ समुंदर में उतर लेकिन उभरने की भी सोच
डूबने से पहले गहराई का अंदाज़ा लगा

अर्श सिद्दीक़ी




चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से
अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए

I go laughing playing with waves of adversity
If life were to be easy, unbearable it would be

असग़र गोंडवी




तिरे माथे पे ये आँचल तो बहुत ही ख़ूब है लेकिन
तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था

असरार-उल-हक़ मजाज़




ये और बात कि आँधी हमारे बस में नहीं
मगर चराग़ जलाना तो इख़्तियार में है

अज़हर इनायती




पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
रोना ख़ुद अपने हाल पे ये ज़ार ज़ार क्या

create that aspect in yourself that others cry for thee

अज़ीज़ लखनवी


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दौलत-ए-दुनिया नहीं जाने की हरगिज़ तेरे साथ
बाद तेरे सब यहीं ऐ बे-ख़बर बट जाएगी

बहादुर शाह ज़फ़र