लड़खड़ाना नहीं मुझे फिर भी
तुम मिरा हाथ थाम कर रखना
फरीहा नक़वी
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मिरे हिज्र के फ़ैसले से डरो तुम
मैं ख़ुद में अजब हौसला देखती हूँ
फरीहा नक़वी
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रात से एक सोच में गुम हूँ
किस बहाने तुझे कहूँ आ जा
फरीहा नक़वी
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तुम मिरी वहशतों के साथी थे
कोई आसान था तुम्हें खोना?
फरीहा नक़वी
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तुम्हारे रंग फीके पड़ गए नाँ?
मिरी आँखों की वीरानी के आगे
फरीहा नक़वी
तुम्हें पाने की हैसिय्यत नहीं है
मगर खोने की भी हिम्मत नहीं है
फरीहा नक़वी
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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में
तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
फरीहा नक़वी
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