वो एक पल की रिफ़ाक़त भी क्या रिफ़ाक़त थी
जो दे गई है मुझे उम्र भर की तन्हाई
एजाज़ रहमानी
आज भी बुरी क्या है कल भी ये बुरी क्या थी
इस का नाम दुनिया है ये बदलती रहती है
एजाज़ सिद्दीक़ी
और ज़िक्र क्या कीजे अपने दिल की हालत का
कुछ बिगड़ती रहती है कुछ सँभलती रहती है
एजाज़ सिद्दीक़ी
दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है
इक मोहर-ए-ख़मोशी है कि होंटों पे लगी है
एजाज़ सिद्दीक़ी
आप आए हैं हाल पूछा है
हम ने ऐसे भी ख़्वाब देखे हैं
एजाज़ वारसी
ऐ संग-ए-आस्ताँ मिरे सज्दों की लाज रख
आया हूँ ए'तिराफ़-ए-शिकस्त-ए-ख़ुदी लिए
एजाज़ वारसी
बरसों में भी छू जाए किसी को तो ग़नीमत
ख़ुशबू-ए-वफ़ा यारो बड़ी सुस्त-क़दम है
एजाज़ वारसी

