सवाल ये है कि इस पुर-फ़रेब दुनिया में
ख़ुदा के नाम पे किस किस का एहतिराम करें
दिवाकर राही
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सोचने की ये बात है 'राही'
सोचते ही रहे तो क्या होगा
दिवाकर राही
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वक़ार-ए-ख़ून-ए-शहीदान-ए-कर्बला की क़सम
यज़ीद मोरचा जीता है जंग हारा है
दिवाकर राही
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वक़्त बर्बाद करने वालों को
वक़्त बर्बाद कर के छोड़ेगा
दिवाकर राही
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वक़्त को बस गुज़ार लेना ही
दोस्तो कोई ज़िंदगानी है
दिवाकर राही
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ख़्वाब देखे थे टूट कर मैं ने
टूट कर ख़्वाब देखते हैं मुझे
डॉ. पिन्हाँ
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मैं शर की शरारत से तो होश्यार हूँ लेकिन
अल्लाह बचाए तो बचूँ ख़ैर के शर से
डॉ. पिन्हाँ
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