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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

गर तरन्नुम पर ही 'दानिश' मुनहसिर है शाइरी
फिर तो दुनिया भर के शाइर नग़्मा-ख़्वाँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी




हो के मजबूर ये बच्चों को सबक़ देना है
अब क़लम छोड़ के तलवार उठा ली जाए

दानिश अलीगढ़ी




मुस्कुरा कर उन का मिलना और बिछड़ना रूठ कर
बस यही दो लफ़्ज़ इक दिन दास्ताँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी




रूदाद-ए-शब-ए-ग़म यूँ डरता हूँ सुनाने से
महफ़िल में कहीं उन की सूरत न उतर जाए

दानिश अलीगढ़ी




तेरे फ़िराक़ ने की ज़िंदगी अता मुझ को
तेरा विसाल जो मिलता तो मर गया होता

दानिश अलीगढ़ी




ज़र्रे ज़र्रे में महक प्यार की डाली जाए
बू तअस्सुब की हर इक दिल से निकाली जाए

दानिश अलीगढ़ी




आख़िर जिस्म भी दीवारों को सौंप गए
दरवाज़ों में आँखें धरने वाले लोग

दानियाल तरीर