उधर शर्म हाइल इधर ख़ौफ़ माने
न वो देखते हैं न हम देखते हैं
दाग़ देहलवी
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उन की फ़रमाइश नई दिन रात है
और थोड़ी सी मिरी औक़ात है
दाग़ देहलवी
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उर्दू है जिस का नाम हमीं जानते हैं 'दाग़'
हिन्दोस्ताँ में धूम हमारी ज़बाँ की है
दाग़ देहलवी
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उज़्र उन की ज़बान से निकला
तीर गोया कमान से निकला
दाग़ देहलवी
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वादा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई
है ज़रा सी बात ख़ुश करना दिल-ए-नाशाद का
दाग़ देहलवी
वाइज़ बड़ा मज़ा हो अगर यूँ अज़ाब हो
दोज़ख़ में पाँव हाथ में जाम-ए-शराब हो
दाग़ देहलवी
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वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
दाग़ देहलवी

