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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ज़मीन मोम की होती है मेरे क़दमों में
मिरा शरीक-ए-सफ़र आफ़्ताब होता है

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




ज़र्द चेहरों की किताबें भी हैं कितनी मक़्बूल
तर्जुमे उन के जहाँ भर की ज़बानों में मिले

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




ज़िंदगी भर मैं खुली छत पे खड़ी भीगा की
सिर्फ़ इक लम्हा बरसता रहा सावन बन के

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




ज़िंदगी के सारे मौसम आ के रुख़्सत हो गए
मेरी आँखों में कहीं बरसात बाक़ी रह गई

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हर एक के चेहरे पे है तशवीश नुमायाँ
बैठे हैं मसीहा तिरे बीमार से लग कर

अज़ीज़ एजाज़




जैसे कोई रोता है गले प्यार से लग कर
कल रात मैं रोया तिरी दीवार से लग कर

अज़ीज़ एजाज़




ऐसे बंदों को जानता हूँ मैं
जिन का वाहिद इलाज मालिश है

अज़ीज़ फ़ैसल