वे बालों में कलर लगवा चुका है
ये धोका पाँच सौ में खा चुका है
अज़ीज़ फ़ैसल
वो अफ़तारी से पहले चखते चखते
खुजूरें और पकौड़े खा चुका है
अज़ीज़ फ़ैसल
वो साड़ी ज्यूलरी के तहाइफ़ पे थी ब-ज़िद
हम सौ रूपे की शाल से आगे नहीं गए
अज़ीज़ फ़ैसल
वो तीस साल से है फ़क़त बीस साल की
चेहरे पे आ चुकी है बुज़ुर्गी जमाल की
अज़ीज़ फ़ैसल
ये दिया मैसेज ट्वीटर पर फ़सादी शख़्स ने
उस को जलती के लिए फ़िल-फ़ौर ऑइल चाहिए
अज़ीज़ फ़ैसल
अभी तो कुछ लोग ज़िंदगी में हज़ार सायों का इक शजर हैं
उन्हीं के सायों में क़ाफ़िले कुछ ठहर गए बे-क़याम कहना
अज़ीज़ हामिद मदनी
ऐसी कोई ख़बर तो नहीं साकिनान-ए-शहर
दरिया मोहब्बतों के जो बहते थे थम गए
अज़ीज़ हामिद मदनी

