तुम उस की बातों में न आना
ये दुनिया तो तमाशा देखती है
अज़हर अदीब
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तू अपनी मर्ज़ी के सभी किरदार आज़मा ले
मिरे बग़ैर अब तिरी कहानी नहीं चलेगी
अज़हर अदीब
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उसे बाम-ए-पज़ीराई पे कैसे छोड़ दूँ अब
यही तन्हाई तो मेरे लिए सीढ़ी बनी है
अज़हर अदीब
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उसी ने सब से पहले हार मानी
वही सब से दिलावर लग रहा था
अज़हर अदीब
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वो दरिया है उसे रस्ता बदलने की आदत है
ज़रा सी बात पर सीने को सहरा कर लिया तू ने
अज़हर अदीब
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ये शख़्स जो तुझे आधा दिखाई देता है
इस आधे शख़्स को अपना बना के देख कभी
अज़हर अदीब
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ज़रा सी देर तुझे आइना दिखाया है
ज़रा सी बात पर इतने ख़फ़ा नहीं होते
अज़हर अदीब
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