उदास हो न तू ऐ दिल किसी के रोने से
ख़ुशी के साथ ग़मों को बिखरते देखा है
असर अकबराबादी
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उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों
तारीकियाँ भी साथ रहें रौशनी के साथ
असर अकबराबादी
उल्फ़त के बदले उन से मिला दर्द-ए-ला-इलाज
इतना बढ़े है दर्द मैं जितनी दवा करूँ
असर अकबराबादी
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ज़िंदगी इक नई राह पर
बे-इरादा ही चलने लगी
असर अकबराबादी
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ज़िंदगी तुझ से ये गिला है मुझे
कोई अपना नहीं मिला है मुझे
असर अकबराबादी
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आह किस से कहें कि हम क्या थे
सब यही देखते हैं क्या हैं हम
असर लखनवी
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आज कुछ मेहरबान है सय्याद
क्या नशेमन भी हो गया बर्बाद
असर लखनवी
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