करम पर भी होता है धोका सितम का
यहाँ तक अलम-आश्ना हो गए हम
असर लखनवी
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क्या क्या दुआएँ माँगते हैं सब मगर 'असर'
अपनी यही दुआ है कोई मुद्दआ न हो
असर लखनवी
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पलकें घनेरी गोपियों की टोह लिए हुए
राधा के झाँकने का झरोका ग़ज़ब ग़ज़ब
असर लखनवी
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फिरते हुए किसी की नज़र देखते रहे
दिल ख़ून हो रहा था मगर देखते रहे
असर लखनवी
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क़ासिद पयाम उन का न कुछ देर अभी सुना
रहने दे महव-ए-लज़्ज़त-ए-ज़ौक़-ए-ख़बर मुझे
असर लखनवी
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सना तेरी नहीं मुमकिन ज़बाँ से
मआनी दूर फिरते हैं बयाँ से
असर लखनवी
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तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
तुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
असर लखनवी

