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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मैं ने लिख्खा है उसे मर्यम ओ सीता की तरह
जिस्म को उस के अजंता नहीं लिख्खा मैं ने

अनवर जलालपुरी




मेरा हर शेर हक़ीक़त की है ज़िंदा तस्वीर
अपने अशआर में क़िस्सा नहीं लिख्खा मैं ने

अनवर जलालपुरी




मुसलसल धूप में चलना चराग़ों की तरह जलना
ये हंगामे तो मुझ को वक़्त से पहले थका देंगे

अनवर जलालपुरी




न जाने क्यूँ अधूरी ही मुझे तस्वीर जचती है
मैं काग़ज़ हाथ में लेकर फ़क़त चेहरा बनाता हूँ

अनवर जलालपुरी




सभी के अपने मसाइल सभी की अपनी अना
पुकारूँ किस को जो दे साथ उम्र भर मेरा

अनवर जलालपुरी




बहुत आसान है मुश्तरका दिलों में तफ़रीक़
बात तो जब है कि बिछड़ों को मिलाया जाए

अनवर जमाल अनवर




दामन पे तो हर एक के छीटें हैं ख़ून की
अब किस से पूछिए कि गुनहगार कौन है

अनवर जमाल अनवर