कैसे कैसे बना दिए चेहरे
अपनी बे-चेहरगी बनाते हुए
अम्मार इक़बाल
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ख़ुद ही जाने लगे थे और ख़ुद ही
रास्ता रोक कर खड़े हुए हैं
अम्मार इक़बाल
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मैं आईनों को देखे जा रहा था
अब इन से बात भी करने लगा हूँ
अम्मार इक़बाल
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मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ
ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
अम्मार इक़बाल
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मैं ने तस्वीर फेंक दी है मगर
कील दीवार में गड़ी हुई है
अम्मार इक़बाल
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उस ने नासूर कर लिया होगा
ज़ख़्म को शाएरी बनाते हुए
अम्मार इक़बाल
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आईना-ए-रंगीन जिगर कुछ भी नहीं क्या
क्या हुस्न ही सब कुछ है नज़र कुछ भी नहीं क्या
आनंद नारायण मुल्ला
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